कहा है वह ग्रीष्म की तपन
कोयल का कूकना वह अमराई का बचपन
आमों पर लगी ललचाई आखें
वनो मे विचरते पैर और ख़ाक छानती बाहें
कहाँ है वह बच्चो का फुदकना
उनका कोलाहल और खिलखिला कर हँसना
वह लंबे चौड़े मिट्टी से सने मैदान
जहा बच्चो को मिलता पहला तत्वज्ञान
ग्रीष्म अब ऐयर कंडीशन मे क़ैद हैं
कोयल अब सोने के पिंजरे मे कूकती हैं
अमराई अब मॉल मे बदल गयी हैं
मैदान अब रास्ते और मकान हो गये हैं
बच्चे अब किताबों मे डूब गये हैं
शायद अब खेल के मोह से निकल गये हैं.
कोयल का कूकना वह अमराई का बचपन
आमों पर लगी ललचाई आखें
वनो मे विचरते पैर और ख़ाक छानती बाहें
कहाँ है वह बच्चो का फुदकना
उनका कोलाहल और खिलखिला कर हँसना
वह लंबे चौड़े मिट्टी से सने मैदान
जहा बच्चो को मिलता पहला तत्वज्ञान
ग्रीष्म अब ऐयर कंडीशन मे क़ैद हैं
कोयल अब सोने के पिंजरे मे कूकती हैं
अमराई अब मॉल मे बदल गयी हैं
मैदान अब रास्ते और मकान हो गये हैं
बच्चे अब किताबों मे डूब गये हैं
शायद अब खेल के मोह से निकल गये हैं.
No comments:
Post a Comment