लड़ता रहा जूझता रहा जिंदगी भर
यूँ के कभी ख़त्म नही होगा ये सफ़र
हर सुबह एक नया इंतजार और
हर शाम दिन के साथ ख़त्म होती आस
फिर सुबह ले आती एक नया इंतजार
यही बन गये मेरे जिंदगी के तार
अचानक लगा की एक दिन आ रही है वो
आगोश मे लेने को बेक़रार
फिर याद आया डूबते दिल को
इंतजार करते करते वो जीना ही भूल गया
सब कुछ पाने की चाह मे
कुछ भी जैसे पाना ना हुआ
इस तरह हो गयी एक और आम मौत
बिना रोशनी किए बुझ गयी एक और जोत.
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