आधा अधूरा सा आदमी
जिन्दगी ढोये जा रहा है,
इस अधूरे शहर मे.
कचरे के गतठ्ठे सी जिन्दगी
हर कदम पर कुछ गिरती हुई,
जिन्दगी ढोये जा रहा है,
इस अधूरे शहर मे.
कचरे के गतठ्ठे सी जिन्दगी
हर कदम पर कुछ गिरती हुई,
सांस लेने कि मशीन सा आदमी,
हर कदम पर जिसकी सांस उखड़ती हुई.
या एक कमाने का कारखाना
बना हुआ है आदमी
कमा रहा है और हर साल
बड जाती है आमदनी.
हर साल कुछ नये परदे
य एक नया कारपेट्
घर ला कर खुश हो जाता है.
परदे और कारपेट् मे उलझ गयी है
अधूरे आदमी की अधूरी जिन्दगी.
सृजन भूल सा गया है
या नही है फुर्सत उसे
लोकल मे रोज धक्के खाने से.
समय है सिर्फ़ रईसो के पास
शहर मे समय भी गोया
कीमती जिन्स हो गया है.
यहां आदमी होना जरूरत नही
विलासिता का एक शौक हो गया है.
हर कदम पर जिसकी सांस उखड़ती हुई.
या एक कमाने का कारखाना
बना हुआ है आदमी
कमा रहा है और हर साल
बड जाती है आमदनी.
हर साल कुछ नये परदे
य एक नया कारपेट्
घर ला कर खुश हो जाता है.
परदे और कारपेट् मे उलझ गयी है
अधूरे आदमी की अधूरी जिन्दगी.
सृजन भूल सा गया है
या नही है फुर्सत उसे
लोकल मे रोज धक्के खाने से.
समय है सिर्फ़ रईसो के पास
शहर मे समय भी गोया
कीमती जिन्स हो गया है.
यहां आदमी होना जरूरत नही
विलासिता का एक शौक हो गया है.
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